GSTAT New Benches & Appeal Framework: Complete Practical Guide
वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) अब संरचित तरीके से काम करने लगा है, और अपीलों की सुनवाई के लिए एक नया ढांचा लागू किया गया है। आदेश संख्या 3/GSTAT/PB/2026 दिनांक 14.05.2026 के माध्यम से GSTAT के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार मिश्रा (रिटायर्ड मुख्य न्यायमूर्ति) ने पीठों के गठन, अपीलों के वर्गीकरण और सुनवाई की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
यह मार्गदर्शन सीधे तौर पर assessee, कर सलाहकारों और विभागीय अधिकारियों की व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि:
- सही पीठ (Bench) की पहचान आसानी से हो सके
- अपील की श्रेणी (Category) का निर्धारण स्पष्ट रहे
- Scrutiny और Listing की प्रक्रिया में भ्रम कम से कम रहे
नीचे इस पूरे ढांचे को सरल भाषा में समझाया जा रहा है।
विधिक आधार: Single Bench और Division Bench की रूपरेखा
Section 109(8) और Rule 110A की प्रासंगिकता
CGST Act 2017 की Section 109(8) तथा CGST Rules 2017 के Rule 110A(1) के अनुसार:
यदि किसी केस में
- कर देयता (tax liability) या अन्य विवादित राशि ₹50 लाख से कम है, और
- उसमें कानून का कोई प्रश्न (question of law) शामिल नहीं है,
तो ऐसे मामलों को, अध्यक्ष की पूर्व स्वीकृति के साथ, Single Bench के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सकता है।
इस प्रावधान के तहत:
- GSTAT के अध्यक्ष या संबंधित State Bench के उपाध्यक्ष को
- अपील के रिकॉर्ड का अवलोकन कर
- यह तय करना होगा कि
- मामला Single Bench के लिए उपयुक्त है या नहीं।
Case को Division Bench से वापस भेजने की प्रक्रिया
Rule 110A(2) के अनुसार:
- यदि कोई केस Single Bench के समक्ष चला गया हो, परंतु
- उस Single Bench को सुनवाई के दौरान यह अनुभूति हो कि:
- उस अपील में किसी प्रकार का question of law शामिल है,
तो ऐसे में:
- Single Bench को
- अपने कारणों को विस्तार से रिकॉर्ड करना होगा, और
- उस केस को
- अध्यक्ष या संबंधित उपाध्यक्ष की स्वीकृति के लिए भेजते हुए
- Division Bench के समक्ष पुनः प्रस्तुत करने की अनुशंसा करनी होगी।
Rule 123 of GSTAT (Procedure) Rules, 2025 – कठिनाइयों के निवारण की शक्ति
GSTAT (Procedure) Rules 2025 के Rule 123 में अध्यक्ष को यह अधिकार दिया गया है कि:
यदि GSTAT के कार्यनिष्पादन या प्रक्रिया में कोई व्यावहारिक कठिनाई आती है, तो अध्यक्ष उसे दूर करने हेतु उपयुक्त आदेश पारित कर सकते हैं।
इसी शक्ति का उपयोग करते हुए, पीठों के गठन और Single Bench/Division Bench के बीच मामलों के वितरण से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों को हल करने के लिए एक समेकित व्यवस्था तय की गई है।
नया ढांचा: सभी अपीलें पहले Division Bench के समक्ष
अध्यक्ष द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कठिनाइयों के निवारण की शक्ति (Rule 123) का उपयोग करते हुए निम्नलिखित व्यवस्था लागू की गई है:
1. अपीलों की प्रारंभिक Listing – Division Bench के समक्ष
- Principal Bench और सभी State Benches के समक्ष
- लंबित (pending)
- और भविष्य में दाखिल (future)
- सभी अपीलें
सबसे पहले Division Bench के समक्ष सूचीबद्ध की जाएंगी।
कोई भी अपील सीधे Single Bench के सामने नहीं जाएगी, भले ही राशि ₹50 लाख से कम हो और प्रथम दृष्टया उसमें कानून का प्रश्न न दिख रहा हो।
2. Division Bench की Screening भूमिका
Division Bench की भूमिका दो स्तरों पर रहेगी:
प्राथमिक परीक्षण (Primary Scrutiny)
- Division Bench यह देखेगी कि
- मामले में question of law शामिल है या नहीं।
- Division Bench यह देखेगी कि
यदि कानून का प्रश्न नहीं है
- तब Division Bench:
- स्पष्ट कारणों को रिकॉर्ड करेगी कि क्यों वह मानती है कि
- केस में कोई question of law नहीं है;
- और उस केस को
- अध्यक्ष या संबंधित उपाध्यक्ष के समक्ष
- यह अनुशंसा करते हुए रखेगी कि
- इसे
Section 109(8)औरRule 110A(1)के तहत - Single Bench को सौंपा जा सकता है।
- इसे
- स्पष्ट कारणों को रिकॉर्ड करेगी कि क्यों वह मानती है कि
- तब Division Bench:
इस तरह Division Bench एक “Filter” के रूप में काम करेगी, जिससे Single Bench के समक्ष केवल वे ही केस जाएं जहां विधिक प्रश्न नहीं है और राशि ₹50 लाख से कम है।